श्री संकटमोचन हनुमान मंदिर


छोटी काशी में सब्जी मंडी स्थित श्रीसंकटमोचन हनुमान मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है जहां प्रात: व सायंकाल नियमित आरती पूजन में भक्त जनों का जमावड़ा रहता है। मंदिर में बजरंगबली की मनोहारी विशाल प्रतिमा सहित शिव¨लग व अन्य देव प्रतिमाएं विराजमान हैं। मंदिर का भव्य द्वार व गुंबद लोगों को दूर से ही आकर्षित करता है। यहां हर मंगलवार को श्रीरामचरित मानस के संगीतमय सुंदरकांड व अखंड पाठ का आयोजन होता रहता है तथा दर्शन पूजन करने को श्रद्धालु उमड़ते रहते हैं। काफी प्राचीन इस मंदिर के बारे में यह भी किवदंती है कि चार मंजिल के इस मंदिर में नींव ही नहीं है|

गोला की सब्जी मंडी में श्रीसंकटमोचन हनुमान मंदिर की स्थापना वर्ष 1976 में हुई थी। बताते हैं कि व्यापारी ओमप्रकाश मिश्र लल्ला, शिवराम गुप्ता, आनंद प्रकाश मिश्रा, ओमप्रकाश गुप्ता, अशोक गुप्ता, सुशील गुप्ता, रामचंद्र अवस्थी एवं रामस्वरूप जायसवाल ने वयोवृद्ध जानकी प्रसाद हलवाई की दुकान के पीछे खाली स्थान पर गौशाला से प्राप्त मां काली की एक खंडित मूर्ति लाकर रखी थी। कालांतर में वहां पूजा-अर्चना की शुरुआत हुई और व्यापारियों के आपसी सहयोग से चंदा एकत्र करते हुए पूजा व प्रसाद आदि की व्यवस्था की जाती रही। इसके बाद इसी स्थान पर श्रीसंकटमोचन हनुमान मंदिर बनाने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए जानकी प्रसाद हलवाई ने भूमि, मंदिर को दान स्वरूप दी। वर्ष 1984 से 1986 के बीच मंडी के व्यापारी रामकृष्ण गुप्ता बजरंगबली के भक्त थे जिन पर श्रद्धा का ऐसा रंग चढ़ा वे व्यापार छोड़कर मंदिर को ही समर्पित हो गए। आलम यह कि अपनी साइकिल, उसके हैंडिल पर फूलों की टहनी और कंधे पर झोला टांगकर वे जय-जय सियाराम का जयकारा लगाते जीवन पर्यंत चंदा एकत्र करते रहे, यहां तक कि मुंबई जाकर वे सिनेस्टार दिलीप कुमार से भी मंदिर का चंदा लाए थे। वर्ष 2004 में उनका स्वर्गवास हुआ तत्पश्चात मंदिर कमेटी का पहला गठन वर्ष 2005 में किया गया था।

प्रति वर्ष बड़े मंगलवार की श्रृंखला में यहां पूरे मास मंदिर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। बजरंगबली को सवा 42 मन के देशी घी के एक मेवा मिश्रित लड्डू का भोग चढ़ाया जाता है| और शोभायात्रा में देवी-देवताओं की आकर्षक झांकियां आकर्षण का केंद्र रहता है |